बुधवार, 26 नवंबर 2014

परिणति

प्रणय को परिणय का रूप धरते हुए इधर कई जगहों पर देखा है ।
काफी अच्छा लगा था आरम्भ में कि चलो 4 घंटे का साथ 24 का हो रहा है, लेकिन, जैसे जैसे हाथों की मेहँदी सूख रही है, प्रेम किसी कोने में पड़ा दीख रहा है।
कई मामलों में प्रेम अक्षुण्ण है परंतु जब बात परिवार को साथ ले कर चलने की होती है , जनता तुरंत अपने सामंजस्य को ले चढ़ बैठती है ;और हर कोशिश करती है कि परिवार का गला घोंट पत्नी की इश्माइल बरक़रार रहे ।
जय हो प्रेमी युगल, मिल्को बाथो सनो फ्रूटो

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